सीएचसी खरगूपुर में लिखी जा रहीं बाहर की दवाइयां

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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शासन व प्रशासन के आदेश बेमानी, चिकित्सक कर रहे मनमानी

गोण्डा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खरगूपुर पर सरकार की मंशा और निर्देशों का खुल्लम खुल्ला मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है। यहां इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को अस्पताल से दवाएं न देकर बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। इससे जहां गरीबों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

वहीं सरकार के निर्देशों को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। सोमवार को सीएचसी पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से उपचार कराने आए मरीजों को चिकित्सकों द्वारा बाहर से दवाएं लिखी गयीं। प्रेमा देवी, सुशीला, अनीता, वसीना आदि मरीजों ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं जिससे उपचार कराना संभव नहीं है।

शासन व प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी चिकित्सा सुविधा देने के लिए सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है परंतु चिकित्सकों द्वारा अपने निजी स्वार्थ के चलते उपचार कराने आए लोगों को अस्पताल से दवाएं न देकर बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं जिससे लोगों को उपचार कराने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी व डॉ एमपी यादव पर आरोप है कि ये धड़ल्ले से बेखौफ होकर गरीबों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। इसकी शिकायत क्षेत्र के लोगों ने जनपद के अधिकारियों से लेकर शासन स्तर तक शिकायती पत्र देकर करते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की है। बताया जाता है कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन इसके बाद भी बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं.

क्योंकि बाहर की दवाओं पर चिकित्सकों का कमीशन तय होता है। डॉक्टर को भगवान के रूप में देखा जाता है किंतु ऐसे डॉक्टर आज के समय में मरीज़ों को लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शासन कितना भी जोर लगा ले और बेहतर सुविधायें अस्पतालों में उपलब्ध करवा दे, लेकिन जब तक ऐसे लालची डॉक्टरों का इलाज नहीं किया जाएगा, तब तक मरीज़ों को लूटने का सिलसला समाप्त नहीं होने वाला है।

गौरतलब है कि ऐसे ही मामलों पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा जिला महिला अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों पर गाज गिरायी जा चुकी है, किन्तु उसके बावजूद भी डॉ स्वेता त्रिपाठी व डॉ एमपी यादव जैसे लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

क्या कहती हैं सीएमओ?

इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ रश्मि वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर बाहर की दवाएं लिखना गलत बात है। अगर ऐसा है तो जांच कराकर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को बाहर से दवाएं लिखने की सख्त मनाही है।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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