Delhi में इस साल 26 हजार से ज्यादा डॉग-बाइट केस, आवारा कुत्तों की शिकायत के लिए MCD लाएगी हेल्पलाइन

Javed Akhtar - संस्थापक- ख़बर हिंदी
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दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इस वर्ष जनवरी से अब तक 26,334 डॉग-बाइट के मामले सामने आए हैं, जो चिंता का विषय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को “बेहद गंभीर” करार देते हुए हाल ही में आदेश दिया कि सभी आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द शहर के अलग-अलग आश्रय गृहों (डॉग शेल्टर्स) में स्थानांतरित किया जाए। आदेश के बाद नगर निगम (एमसीडी) ने इस दिशा में तेज कार्रवाई का भरोसा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों से बढ़ती घटनाएं न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि इस पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे समयबद्ध तरीके से सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखें, साथ ही इनकी देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएं।

एमसीडी का एक्शन प्लान

एमसीडी के मेयर राजा इकबाल सिंह ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे और इस समस्या का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। लोगों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, लेकिन इसके साथ हम जानवरों के कल्याण का भी ध्यान रखेंगे। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण मिले और कुत्तों को भी बेहतर रहने की स्थिति उपलब्ध हो।”

इसके तहत एमसीडी ने जल्द ही एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की घोषणा की है, जिस पर लोग अपने क्षेत्र में आवारा कुत्तों की सूचना दे सकेंगे। सूचना मिलते ही निगम की टीम मौके पर जाकर संबंधित कुत्तों को पकड़कर निर्धारित शेल्टर में ले जाएगी।

आंकड़े बताते हैं चिंता की बात

पीटीआई द्वारा प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक दिल्ली में कुत्तों के काटने के 26,334 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 9,920 केस एमसीडी के अस्पतालों में, जबकि 15,010 केस उसके एंटी-रेबीज टीकाकरण (ARV) केंद्रों में दर्ज हुए। तुलना करें तो, साल 2024 में डॉग-बाइट के कुल 68,090 मामले सामने आए थे, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं—जैसे कुत्तों का अनियंत्रित प्रजनन, भोजन और आश्रय की कमी, और कुछ इलाकों में आवारा कुत्तों का झुंड बनाकर घूमना।

डॉग शेल्टर बनाने में आ रही चुनौतियां

एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि सभी 12 जोनों में कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाने की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन भूमि आवंटन एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि प्रत्येक क्षेत्र में डॉग शेल्टर स्थापित हो, ताकि आवारा कुत्तों को समय पर वहां पहुंचाया जा सके। हालांकि, जमीन उपलब्ध कराने में कुछ समय लगेगा।”

सत्या शर्मा ने यह भी बताया कि हेल्पलाइन के जरिए नागरिक सीधे एमसीडी को सूचना देंगे और टीम मौके पर पहुंचकर कुत्तों को पकड़ लेगी। साथ ही, शेल्टर में उनकी देखभाल, भोजन और नसबंदी की व्यवस्था की जाएगी।

नसबंदी कार्यक्रम को लेकर नई रणनीति

इससे पहले एमसीडी की स्थायी समिति ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए एक उपसमिति का गठन किया था। पिछले महीने हुई बैठक में उपसमिति ने तय किया कि नसबंदी कार्यक्रम में वर्तमान में शामिल गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को फिर से शामिल किया जाए और साथ ही अधिक सक्षम और संसाधनयुक्त NGOs को भी जोड़ा जाए।

अधिकारियों का मानना है कि अगर नसबंदी कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर लागू किया जाए तो आने वाले वर्षों में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जा सकती है।

लोगों में बढ़ रही दहशत

दिल्ली के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के हमले से लोग दहशत में हैं। खासकर सुबह और रात के समय सड़कों पर निकलने में लोगों को डर लगता है। माता-पिता अपने छोटे बच्चों को बाहर खेलने भेजने से कतराने लगे हैं। कुछ क्षेत्रों में तो लोग लाठी या डंडा लेकर ही टहलने जाते हैं।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि पिछले महीने उनके मोहल्ले में तीन बच्चों को अलग-अलग दिनों में कुत्तों ने काट लिया। “हमने कई बार शिकायत की, लेकिन टीम समय पर नहीं आई। अगर हेल्पलाइन शुरू हो जाती है और तुरंत कार्रवाई होती है तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।”

जानवरों के अधिकार पर भी जोर

हालांकि, एमसीडी और दिल्ली सरकार दोनों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में जानवरों के अधिकार और कल्याण की अनदेखी नहीं होगी। शेल्टर में कुत्तों को पर्याप्त भोजन, साफ पानी और चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही, NGOs की मदद से इन्हें गोद लेने (adoption) की पहल भी की जाएगी।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पकड़कर शेल्टर में डालना ही समाधान नहीं है। जरूरत है कि आवारा कुत्तों के प्रजनन को नियंत्रित किया जाए, शहर में कचरे और खुले मांस के टुकड़ों की सफाई व्यवस्था सुधारी जाए और लोगों को भी यह समझाया जाए कि कुत्तों के साथ जिम्मेदार व्यवहार कैसे किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद है कि एमसीडी का हेल्पलाइन और शेल्टर प्लान तेजी से लागू होगा और आने वाले महीनों में डॉग-बाइट के मामलों में कमी आएगी।

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मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन विषय के साथ पोस्ट ग्रेजुएट, लगभग 4 वर्षो से लिखने और स्वतंत्र पत्रकारिता करने का अभ्यास, घूमने का शौक कुछ अलग करने का साहस बातचीत के लिए इंस्टाग्राम.
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