वसीम हत्या कांड : कातिलों तक पहुंची पुलिस, हाथ लगे पुख्ता सबूत

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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गोण्डा जिले के कोतवाली देहात के खोरहंसा चौकी क्षेत्र अंतर्गत पूरे तिवारी गांव निवासी 28 वर्षीय वसीम उर्फ बब्लू पुत्र सलीम का हत्या कांड , उसको सोमवार की रात करीब साढ़े नौ बजे फोन करके किसी व्यक्ति द्वारा जमुनियाबाग बुलाया गया, और उसकी का हत्या कांड कर शव को परसापुर-पाण्डेयपुर के बीच गोण्डा अयोध्या नेशनल हाईवे के किनारे फेंक दिया गया।

गोण्डा जिले के कोतवाली देहात के खोरहंसा चौकी


सोमवार को जब काफी देर तक वसीम वापस घर नहीं आया तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। रात में करीब 11 बजे युवक का शव घर से कुछ दूरी पर नेशनल हाईवे के किनारे मिला। उसकी मोटरसाइकिल घटनास्थल से थोड़ी दूर खड़ी थी। वसीम का गला काले रंग के गमछे से कसा हुआ था। उसके सिर पर चोट और गले पर खरोंच के निशान थे। इस घटना से पूरे क्षेत्र में हड़कंप और परिवार में कोहराम मच गया।

सोमवार की रात

बताया जाता है युवक वसीम उर्फ बब्लू घर पर रहकर आनलाइन मनी ट्रांसफर के साथ ही प्रापर्टी डीलिंग का भी काम करता था। मृतक वसीम के भाई का कहना है कि सोमवार की रात वह घर पर खाना खा रहा था। तभी किसी ने फोन करके उसे जमुनियाबाग बुलाया। उसका कहना है कि जब वह जमुनियाबाग से काफी देर तक घर नहीं लौटा तो उसकी तलाश की गई, तो उसका शव घर से कुछ दूरी पर पाण्डेयपुर के पास स्थित एक ईंट भट्ठा के सामने गोण्डा-अयोध्या नेशनल हाईवे के किनारे पड़ा मिला। हालांकि इलाकाई पुलिस इसे दुर्घटना बता रही थी लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने से मौत होने का खुलासा हुआ।

घटना के संबंध में पुलिस ने कि पूछताछ शुरू

घटना के संबंध में पुलिस ने शक के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। इसके साथ ही सड़क किनारे स्थित दुकानों व मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, तथा मृतक की मोबाइल की सीडीआर भी खंगाला गया। सूत्रों का कहना है कि वृहस्पतिवार को पुलिस जब सख्त हुई तो हिरासत में लिए गए कुछ लोगों से अहम सुराग हाथ लगे। माना जा रहा है कि पुलिस के हाथ हत्या से संबंधित पुख्ता सबूत मिले हैं। आलाकत्ल भी बरामद किया जा चुका है। ऐसे में पुलिस खुलासे के करीब पहुंच चुकी है। कातिल उसकी गिरफ्त में हैं

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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