गोण्डा के सिद्दीकी परिवार के पांच लोगों का क़ातिल सवा लाख का कुख्यात इनामी बदमाश साहब सिंह STF के एनकाउंटर में ढेर

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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 उत्तर प्रदेश एसटीएफ के नोएडा यूनिट ने कुख्यात बदमाश साहब सिंह को एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया। साहब सिंह पर यूपी के गोण्डा जिले की पुलिस ने एक लाख तथा बुलंदशहर पुलिस ने पच्चीस हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह लूट, डकैती और हत्या के कई मामलों में वांछित था और पुलिस उसे ढूंढ रही थी।


लखनऊ उत्तर प्रदेश में सवा एक लाख रुपये का इनामी कुख्यात बदमाश साहब सिंह स्पेशल टास्क फोर्स के एनकाउंटर में मारा गया। नोएडा एसटीएफ ने बुलंदशहर में ऑपरेशन को अंजाम दिया। यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट और बुलंदशहर पुलिस की संयुक्त टीम से गुलावटी थाना क्षेत्र में इनामी बदमाश साहब सिंह की मुठभेड़ हो गई जिसमें उसे गोली लग गई।

इसके बाद पुलिस ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुख्यात साहब सिंह फिरोजाबाद के जसराना का रहने वाला था। पुलिस ने साहब सिंह पर गोण्डा जिले में एक लाख और बुलंदशहर में 25,000 का इनाम घोषित कर रखा था। वह घरों में डकैती और हत्या को अंजाम देता था और घुमंतू जनजाति के कुख्यात गैंग का सदस्य था।

वह डकैती के रजिस्टर्ड गैंग D-14 का सक्रिय सदस्य था। साहब सिंह के अपराधों की सूची काफी लंबी रही है। 18 अगस्त 2001 को उसने गोण्डा के मोहल्ला न्यू मेवातियान में सिद्दीकी परिवार के घर में घुसकर साथियों के साथ डकैती की थी और घर के सभी 14 लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

इस घटना में दो बच्चों सहित कुल पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं 19.12.2006 को अलीगढ़ के छर्रा थाना क्षेत्र में एक घर में घुसकर दो लोगों की हत्या कर डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। 20.09.2014 को बुलंदशहर के कोतवाली नगर क्षेत्र में एक घर में घुसकर मारपीट कर सोने-चांदी के जेवर और डबल बैरल बंदूक को लूट लिया था।

20.10.2014 को डिबाई थाना क्षेत्र में घर में घुसकर मारपीट कर लोगों को घायल कर दिया था और जेवर-हथियार लूटकर फरार हो गया था। पुलिस को लम्बे समय से इसकी तलाश थी।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी
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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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