Gonda News: खुद को कमजोर न समझें महिलाएं- गीता पांडेय

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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खुद को कमजोर न समझें महिलाएं : गीता पांडेय

गोण्डा। गीता चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक गीता पाण्डेय ने कहा कि व्यक्ति को समाज के प्रति अपने दायित्वों को कभी नहीं भूलना चाहिए। बुधवार को गीता चैरिटेबल ट्रस्ट के सह संस्थापक व देश की जानी मानी फर्नीचर कंपनी जीकेएन सिटिंग कलेक्शन की डायरेक्टर श्रीमती गीता पांडेय ने कहा कि महिलाओं को कभी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। वह भी पुरुषों की तरह समाज के प्रति अपनी कर्तव्य निभाने में सक्षम हैं।

शिक्षा के साथ-साथ राजनीति व नौकरियों में भी महिलाएं आज पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। श्रीमती पांडेय शहर से सटे मोकलपुर ग्राम पंचायत में गुरु बाबा स्थान पर आयोजित विराट विष्णु महायज्ञ में प्रतिभाग करने आई थीं। यहां उन्होंने मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने अपने विकास की गाथा बताते हुए कहा कि उनका मायका परेड सरकार में है और ससुराल किनकी गांव में। उनके पति शुरुआत में एक फर्नीचर कंपनी में 300 रुपये मासिक की नौकरी करते थे, लेकिन भगवान की इच्छा हुई तो उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर अग्रसर हैं।

कंपनी के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार

श्रीमती पांडेय ने कहा कि आज वह एक तरफ अपनी कंपनी के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार दे रहीं हैं वहीं दूसरी तरफ गीता चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से निर्धन कन्याओं की शादी, महिलाओं के स्वावलंबन के लिए प्रशिक्षण, निशुल्क स्वास्थ्य शिविर व अन्य कार्यक्रम चला रही हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 300 छोटे-छोटे मंदिरों का जीर्णोद्धार भी उन्होंने कराया है।

श्रीमती पांडेय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का समाज के प्रति कर्तव्य होता है कि वह अपने आय का कुछ हिस्सा समाज के लिए खर्च करे। इसी कर्तव्य की पूर्ति के लिए वे अग्रसर हैं। गीता पांडेय ने यहां पहुंचकर गुरुबाबा की परिक्रमा की तथा कथावाचक महंत रामबालक दास जी महाराज मणिराम दास छावनी अयोध्या का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।

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यहां आगामी 5 मार्च को भंडारा आयोजित होगा। इस अवसर पर दुर्गा प्रसाद चौबे, महेश चौबे पूर्व प्रधान, नीरज चौबे, दद्दू ओझा, सुजीत चौबे, पिंटू, बद्री विशाल ओझा, पिंटू पांडेय, ननकू मिश्रा, अंकुर तिवारी, दुर्गा प्रधान, शिव कुमार चौबे, श्यामसुंदर तिवारी, आलोक चौबे, लल्लू चौबे, पलऊ चौबे, उमानाथ चौबे, सुरेंद्र नाथ शुक्ल, संदीप तिवारी, नीरज तिवारी आदि मौजूद रहे।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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