Gonda News: अधिवक्ता पर छेड़खानी के मुकदमे ने पकड़ा तूल, एसपी ने विवेचक को किया तलब

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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  • मुकेश शुक्ला ने आपराधिक षडयंत्र के तहत कोतवाली में दर्ज कराया था मुकदमा
  • पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर से मिले बार एसोसिएशन के अध्यक्ष

गोण्डा। जिले में फर्जी मुकदमा लिखाने का चलन आम हो गया है। एक अधिवक्ता के खिलाफ छेड़खानी का केस दर्ज कराया गया जिसकी जानकारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महराज श्रीवास्तव को हुई तो वह पीड़ित अधिवक्ता के साथ कप्तान आकाश तोमर से मिले और उन्हें पूरी जानकारी दी। इस पर पुलिस कप्तान ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए विवेचक को केस डायरी के साथ तलब किया है।

पुलिस अधीक्षक को दिये गये प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि सात दिसंबर को अधिवक्ता राजकुमार भारती बहराइच रोड स्थित शिव वस्त्रालय पर कपड़ा बदलने गये थे। कपड़ा बदलने को लेकर मुकेश शुक्ला, योगेश शुक्ल, निवासी फरेंदा शुक्ल थाना खरगूपुर आदि ने गाली दी और मारा-पीटा। उक्त घटना दुकान के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।

पुलिस पीड़ित अधिवक्ता व विपक्षीगण को थाने ले गयी और पीड़ित का मेडिकल कराया लेकिन मुकदमा नहीं लिखा। पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर व अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने सीओ से सीसीटीवी फुटेज खंगालने के लिए कहा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि एएसपी के आदेश पर 24 फरवरी को धारा 323, 504, 506 का मुकदमा मुकेश आदि पर दर्ज हुआ तो पेशबंदी में मुकेश शुक्ला द्वारा आपराधिक षडयंत्र के तहत अपने रसूख व थाने के प्रभाव पर झूठा मुकदमा अपने यहां काम करने वाली महिला को मोहरा बनाकर 4 मार्च को धारा 354 में दर्ज करा दिया गया।

बार-बार सीसीटीवी फुटेज के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन सच्चाई छिपाने के लिए ऐसा नहीं हुआ। ऐसे मेंं विपक्षी द्वारा दर्ज निराधार मुकदमें की निष्पक्ष जांच कराकर खत्म कराने की मांग की गयी। इस संबंध में एसपी आकाश तोमर ने बताया कि प्रकरण गंभीर है। विवेचक को केस डायरी समेत तलब किया गया है।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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