21वीं बार जिलाध्यक्ष बने अजीत सिंह और आठवीं बार जिला मंत्री चुने गए राधामोहन पांडेय

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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गोण्डा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ जनपद गोंडा का वार्षिक निर्वाचन बुधवार को स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज में संपन्न हुआ जिसमें अजीत सिंह 21 वीं बार जिला अध्यक्ष तो वही राधा मोहन पांडेय 8 वीं बार जिला मंत्री पद पर निर्वाचित हुए। निर्वाचन में कुल 144 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया. जिला अध्यक्ष पद पर अजीत सिंह को 117 जबकि भवानी शंकर मिश्र को मात्र 27 मत प्राप्त हुए।

इसी प्रकार जिला मंत्री पद पर राधा मोहन पांडेय को 111 मत प्राप्त हुए जबकि रोशनलाल को महज 35 मतों से संतोष करना पड़ा। उपाध्यक्ष पद पर डॉ शिवानन्द (नंदू), अनुपम कुमार पांडेय, विष्णु जीत सिंह, राजेश कुमार सिंह एवं श्रीमती गिरिजा मिश्रा निर्विरोध निर्वाचित हुए। जिला संयुक्त मंत्री पद पर डॉ पवन प्रताप सिंह, राम सजीवन वर्मा, दिलीप कुमार सिंह, केके यादव, महात्मा चौधरी, श्रीमती सुनीता रानी निर्विरोध निर्वाचित हुए। वहीं कोषाध्यक्ष के पद पर वंशीधर तिवारी चुने गए। सदस्य कार्यकारिणी के पद पर प्रिय शंकर मिश्र, घनश्याम ओझा, शिवम सिंह, इंद्रजीत सिंह, विनीत कुमार सिंह, बृजेंद्र प्रताप सिंह, राधेश्वर तिवारी, अमरचंद, महेश चंद्र सिंह, देव सिंह, विद्या प्रसाद, शांतनु विक्रम सिंह निर्विरोध निर्वाचित हुए।

इस मौके पर जिला संरक्षक बृजेश द्विवेदी ने अयोध्या से आए हुए जिला पदाधिकारियों का पुष्प गुच्छ भेंट कर एवं शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। इस अवसर पर राजेश चंद्र पांडेय, डॉ पदम नाथ पांडेय, सहदेव सिंह, धर्मवीर सिंह, डीके पांडेय, दीपक चौबे, श्रीमती कामिनी यादव, रेखा सिंह, रामकिशोर यादव, डॉ अजय कुमार मिश्र, अफजल अली, रंजीत कुमार, रफीउल्लाह, कृष्ण कुमार शुक्ला, शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव, दिलीप कुमार पांडेय, कौशल कुमार सिंह, मनमोहन सिंह, अनूप शुक्ला, आरडी आर पांडेय, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, कृष्ण देव शुक्ला, सूर्य नारायण, राजेंद्र तिवारी, राकेश शुक्ला, अशोक कुमार सहित 300 से अधिक शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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