घर से बुलाकर युवक की हत्या, हाईवे के किनारे फेंका शव

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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  • मृतक के शरीर पर मिले चोट के निशान, परिवार में मचा कोहराम

गोण्डा। यूपी के योगी राज में गुंडों का बोल-बाला जिले के खोरहंसा चौकी क्षेत्र में बदमाश बेखौफ हैं जो सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देते रहते हैं और पुलिस तमाशबीन बनी रहती है। चौकी से कुछ दूरी पर बदमाशों ने एक युवक की हत्या कर शव को गोण्डा-अयोध्या नेशनल हाईवे के किनारे फेंक दिया। घटना की सूचना मिलते ही सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया।
कोतवाली देहात के खोरहंसा चौकी क्षेत्र के पूरे तिवारी गांव निवासी 28 वर्षीय वसीम उर्फ बब्लू पुत्र सलीम को सोमवार की रात करीब साढ़े नौ बजे फोन करके किसी व्यक्ति द्वारा जमुनियाबाग बुलाया गया था। काफी देर तक जब वह वापस नहीं आया तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। रात में करीब 11 बजे युवक का शव घर से कुछ दूरी पर सड़क किनारे मिला। घटना से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच और परिवार में कोहराम मच गया। बताया जाता है युवक वसीम उर्फ बब्लू घर पर रहकर आनलाइन मनी ट्रांसफर के साथ ही प्रापर्टी डीलिंग का भी काम करता था। युवक के भाई गुड्डू का कहना है कि सोमवार की रात वह घर पर खाना खा रहा था। तभी किसी ने फोन करके उसे जमुनियाबाग बुलाया। भाई का कहना है कि जब वह जमुनियाबाग से काफी देर तक घर नहीं लौटा तो उसकी तलाश की गई, तो उसका शव घर से कुछ दूरी पर पाण्डेयपुर के पास स्थित एक ईंट भट्ठा के सामने गोण्डा अयोध्या नेशनल हाईवे के किनारे पड़ा मिला। लोगों के मुताबिक शव पर चोट के गंभीर निशान भी पाए गए हैं और गला उसका एक गमछे से कसा हुआ था। परिजनों का आरोप है कि उसके भाई की हत्या की गई है। फिलहाल मामले को लेकर पुलिस छानबीन में जुटी हुई है। वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

इस संबंध में कोतवाली देहात के प्रभारी निरीक्षक महेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि डायल 112 को सड़क दुर्घटना की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा कि घटना की गहनता से जांच पड़ताल की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण का पता चल सकेगा।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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