why pravasi bharatiya divas is celebrated only on january 9 know the history । 9 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं प्रवासी भारतीय दिवस, जानें इसके पीछे का इतिहास

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प्रवासी भारतीय दिवस - इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: ट्विटर
प्रवासी भारतीय दिवस

नई दिल्ली: देश के विकास में भारतवंशियों की भागीदारी पर गौरवान्वित होने के लिए हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। इस बार 17वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 9 जनवरी को मध्य प्रदेश के इंदौर में हो रहा है। मालवा की धरती पर प्रवासी भारतीयों के बीच देशों की संभावनाओं पर मंथन का आज दूसरा दिन है। इंदौर में तीन दिनों तक चलने वाले प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के रविवार को आगाज हुआ था और इस खास दिन को सेलिब्रेट करने के लिए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इंदौर पहुंचेंगे।

बता दें कि 17वें प्रवासी भारतीय दिवस की थीम “प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति में विश्वसनीय दावेदार” है और विश्व से प्रवासी भारत की प्रगति के दावेदार बन रहे हैं। देश में सबसे पहले भले ही 2003 में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया लेकिन इसकी तारीख 9 जनवरी रखी गई। आइए जानते हैं फाइनल 9 जनवरी की तारीख ही क्यों तय की गई-

जानिए, 9 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है प्रवासी भारतीय दिवस

बता दें कि इस खास दिन का संबंध परिजन से है महात्मा गांधी हो रहा है। 9 जनवरी, 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आए थे इसलिए 9 जनवरी की तारीख को प्रवासी भारतीय दिवस मनाने के लिए चुना गया। पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाने का फैसला एलएम सिंघवी की अध्यक्षता में भारत सरकार द्वारा भारतीय डायस्पोरा की उच्च स्तरीय समिति की स्थापना के अनुसार लिया गया था। 8 जनवरी 2002 को भारत के प्रधान मंत्री अटल बिहारी सम्मिलन ने 9 जनवरी को भारतीय घोषणा दिवस को व्यापक स्तर पर मनाने की की।

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन मनाने का उद्देश्य क्या है?
– प्रवासी भारतीय समुदाय की उपलब्धियां दुनिया के सामने लाना है, जिससे दुनिया अपनी शक्तियों का शिकार हो सकती है।
– देश के विकास में भारत के वंशजों का योगदान है इसलिए साल 2015 के बाद से हर दो साल में एक बार प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन आयोजित किया जाता है।
– प्रवासी भारतीयों को देश से जोड़ने में पीएम मोदी ने भी अहम भूमिका निभाई है। वो जहां भी विदेशी दौरे पर जाते हैं वहां प्रवासी भारतीयों के बीच भारत की एक अलग पहचान लेकर जाते हैं।
– पीएम मोदी के इस कदम से प्रवासी भारतीय भारत की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं।
– इस घटना ने प्रवासी भारतीयों की सोच को सही तरीके से बदलने का काम किया है।
– इसके माध्यम से प्रवासी भारतीयों को देशवासियों से जुड़ने का अवसर मिला है।

दुनिया भर में फ़िलहाल प्रवासी भारतीयों का नेटवर्क
प्रवासी भारतीयों का नेटवर्क दुनिया भर में फैलता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रवासी भारतीयों की संख्या है। 2019 में दुनिया भर में इनकी संख्या 1.8 करोड़ थी। प्रमाण की संख्या में दूसरे नंबर पर मैक्सिको और तीसरे नंबर पर चीन है। प्रवासी भारतीय दिवस के माध्यम से दुनिया भर में प्रवासी प्रवासी भारतीयों का बड़ा नेटवर्क बनाने में भी मदद मिलती है, जिससे भारतीय उद्योग को भी एक गति मिली है। हमारे देश की युवा पीढ़ी को भी इसके माध्यम से विदेश में बस जुड़ाव से जुड़ाव में मदद मिलती है वहीं विदेश में रहते हुए के माध्यम से देश में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने में सहयोग मिल रहा है।

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