UP NEWS-अब यूपी एटीएस के हत्थे चढ़ा गोण्डा का सलमान

A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
3 Min Read

सद्दाम शेख व रईस के बाद एटीएस की बड़ी कार्रवाई, आईएसआई से जुड़े हैं तार

गोण्डा। यूपी एटीएस ने जिले के वजीरगंज के दुआबा धनेश्वरपुर निवासी मोहम्मद सलमान सिद्दीकी को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। इससे पहले एटीएस ने करनपुर पठान पुरवा के सद्दाम व तरबगंज के रामापुर निवासी रईस को गिरफ्तार किया था।

रईस और सलमान की मुलाकात गोण्डा में हुई थी, लेकिन मुंबई में मकान की रंगाई-पुताई करने के दौरान दोनों में दोस्ती गहरा गई और सिलसिला मुल्क से गद्दारी तक पहुंच गया। दोनों एक-दूसरे के पूरक बनकर पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने लगे।

2 लाख लेना पड़ा भारी, ATS ने किया अरेस्ट

यूपी एटीएस से पूछताछ में जो बात सामने आई है उसके मुताबिक नेपाल की बैठक में रईस व उसके चारों साथियों को दो-दो लाख रुपये मिले थे। इसके बाद ये लोग लखनऊ गये और वहां से अपने-अपने घर चले गये थे। उस समय भी रईस अपने घर गोण्डा जिले के तरबगंज क्षेत्र के रामापुर में ही रहता था। अब यूपी एटीएस पूरे मामले की छानबीन करने के साथ ही रईस के साथियों की तलाश में भी जुटी हुई है।

बताया जाता है कि नेपाल की बैठक में रईस आईएसआई का भरोसा हासिल करने में जुटा रहा। उसने मौखिक जानकारी देने के साथ ही भारतीय सेना से संबंधित कई अहम दस्तावेज भी दिए। रईस की गिरफ्तारी में भी एटीएस ने सेना के दस्तावेज आईएसआई को देने का जिक्र किया है। दरअसल अभी रईस न सिर्फ आईएसआई को सूचना दे रहा था, बल्कि उसके लिए हिंदुस्तान में एक टीम भी तैयार कर रहा था।

नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है आतंकियों के लिए मुफीद

नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा व राम जन्मभूमि अयोध्या धाम से जुड़ी सरहद को आतंकी अपना ठिकाना बना रहे हैं। बीते 15 दिनों में एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) जिले के रहने वाले तीन आतंकियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

इतना ही नहीं, पूर्व में आतंकी की छानबीन को लेकर एटीएस और एनआइए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) की टीमें भी छापेमारी कर चुकी हैं। यह कार्रवाई इस बात की गवाही दे रही है कि नेपाल की खुली सीमा होने के कारण देवीपाटन मंडल आतंकियों और अपराधियों के लिए सुरक्षित स्थान बनता जा रहा है।

Share This Article
सम्पादक- ख़बर हिंदी
Follow:
सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Exit mobile version