बच्चे को दें खुला आसमान, दायरे में बंद न करें : नरेंद्र मोदी

A R Usmani
A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में बोले पीएम, शिक्षकों व छात्र-छात्राओं ने ली सीख

बच्चों को एक दायरे में बंद न करें- PM Modi

गोण्डा। परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में पीएम मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि ‘बच्चों को एक दायरे में बंद न करें, लेकिन उनके ऊपर हमारा ध्यान रहना चाहिए कि कहीं आदत न खराब हो जाए। खुले मन से बच्चे को समाज के विस्तार की ओर ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चे को खुला आसमान और अवसर दें ताकि वो समाज में ताकत बनकर उभरें।

परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम का सजीव प्रसारण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया गया जिसे राजकीय हाईस्कूल रामपुर टेपरा में स्कूल के शिक्षक अरविंद कुमार श्रीवास्तव, समर प्रताप सिंह, श्रीकांत वर्मा के साथ ही सभी छात्र-छात्राओं ने देखा और सुना। पीएम मोदी ने कहा कि आजकल कक्षा में टीचर भी फोन लेकर आते हैं। अगर स्क्रीन पर कुछ डिलीट हो जाए तो उसका सर्दियों में पसीना छूट जाता है। छात्र अपने शिक्षक की बात को बहुत मूल्यवान समझता है।

दुर्बल छात्र से सवाल पूछते हैं- PM Modi

कभी-कभी शिक्षक क्लास में अपना प्रभाव पैदा करने के लिए किसी दुर्बल छात्र से सवाल पूछते हैं। अगर वह नहीं बता पाता है तो उसे डांट देते हैं। पीएम ने कहा कि सच से मुकाबला करने की आदत नहीं छोड़ना चाहिए। स्वीकार करना चाहिए। अगर पहले से ही आप कह देंगे और 5 नंबर ज्यादा मिल जाएं तो मामला ठीक रहता है। दिन रात हम तुलना के भाव में जीते हैं। यह तनाव का मूल कारण है।

परीक्षा जीवन का अंत नहीं- PM Modi

हम अपने में जिएं, अपने से सीखें, खुश रहें। इससे तनाव को खत्म कर सकते है। परीक्षा गई तो जीवन गया। यह नहीं सोचना है। परीक्षा जीवन का अंत नहीं है। तनाव से लड़ने का मूल मंत्र रखना चाहिए। पीएम मोदी ने राजनीति पर किए गए सवाल ऑउट ऑफ सिलेबस बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आदतन आलोचना करते हैं।

ऐसे लोगों पर ध्यान न दें। आलोचना समृद्ध लोकतंत्र की पूर्व शर्त है। मां-बाप से भी मेरा आग्रह है कि टोका-टोकी के जरिए आप अपने बच्चों को ‘मोल्ड’ नहीं कर सकते। अपनों की आलोचना को सकारात्मक लें। हमें अपना फोकस छोड़ना नहीं चाहिए। आरोप और आलोचना के बीच बहुत बड़ी खाई है। हम आरोपों को आलोचना न समझें। आरोपों को कभी भी लाइट नहीं लेना चाहिए।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी
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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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