
लखनऊ में फर्जी मुकदमों के जरिए निर्दोष लोगों को जेल भिजवाने वाले अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) विवेकानंद शरण त्रिपाठी की अदालत ने परमानंद को दोषी मानते हुए 5.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
कैसे करता था खेल
परमानंद गुप्ता लोगों को झूठे केस में फँसाने के लिए अपनी पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली पूजा रावत का इस्तेमाल करता था। अदालत में पेश सबूतों से साफ हुआ कि गुप्ता पूजा से वही बयान दिलवाता था, जैसा वह चाहता था। इन झूठे मामलों के पीछे मुख्य कारण जमीन और संपत्ति का विवाद था।
मामले की शुरुआत तब हुई जब गुप्ता ने विभूतिखंड निवासी अरविंद यादव और उनके भाई अवधेश यादव पर रेप और SC/ST एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना एसीपी विभूतिखंड राधा रमण सिंह को सौंपी गई। जांच में न तो रेप के आरोप सही पाए गए, न ही कोई सबूत मिले। कॉल डिटेल और लोकेशन रिकॉर्ड ने भी आरोपियों की बेगुनाही साबित कर दी।
29 फर्जी मुकदमे का खुलासा
जांच के दौरान सामने आया कि परमानंद गुप्ता ने अब तक 29 मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें से 18 उसने खुद दर्ज कराए और 11 पूजा रावत के जरिए। सभी मामले फर्जी साबित हुए।
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अदालत में खुली पोल
इस केस का सबसे अहम मोड़ तब आया जब अदालत ने गवाही के लिए पूजा रावत को बुलाया। 4 अगस्त 2025 को दाखिल प्रार्थना पत्र में पूजा ने खुलासा किया कि वह लखनऊ काम की तलाश में आई थी और परमानंद व उसकी पत्नी ने उसे अपने जाल में फंसा लिया। उसने साफ कहा कि कभी उसके साथ दुष्कर्म या छेड़छाड़ नहीं हुई, बल्कि परमानंद उसे झूठा बयान देने के लिए मजबूर करता था। अदालत के सामने उसने सच्चाई स्वीकार की और माफी की गुहार लगाई।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि परमानंद गुप्ता जैसे लोग वकालत करने योग्य नहीं हैं। अदालत ने आदेश दिया कि इस निर्णय की प्रति बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजी जाए, ताकि उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई हो सके। वहीं, पूजा रावत को सच सामने लाने पर सशर्त माफी दे दी गई।
पुलिस जांच में सामने आया सच
एसीपी राधा रमण सिंह ने बताया कि कथित घटनास्थल की जाँच करने पर वहां कोई कमरा ही नहीं मिला, जबकि मुकदमे में यही स्थान बताया गया था। इलाके के लोगों ने भी गवाही दी कि पूजा कभी उस मोहल्ले में रही ही नहीं। फोन रिकॉर्ड में भी पीड़िता और आरोपियों के बीच कोई बातचीत या संपर्क नहीं मिला।
फर्जी केस दर्ज कराने और 29 निर्दोष लोगों की जिंदगी खराब करने के अपराध में वकील परमानंद गुप्ता को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने साफ किया कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों को कानून के दायरे में लाना बेहद जरूरी है।
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