Gonda-जिसने देखा है मदीना वो यही कहता है, सब्ज गुम्बद पे नज़र जा के ठहर जाती

A R Usmani
A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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दरबारे आलिया मीनाइया में हजरत अमीर खुसरो की याद में हुआ आल इंडिया मुशायरे का आयोजन

गोण्डा। बसंत पचंमी के अवसर पर वृहस्पतिवार की रात शहर के दरबारे आलिया मीनाइया में हज़रत अमीर खुसरू की याद में आल इंडिया नातिया मुशायरे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन हज़रत शाह जमाल मीना साहब की सरपरस्ती, डॉ लायक अली की अध्यक्षता, जावेद रज़ा सिद्दीकी के संयोजन व कफील अम्बर के संचालन में हुआ।

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तिलावते कलामे पाक के बाद मुशायरे के अध्यक्ष हाजी डॉ लायक अली ने अपने खुतबऐ सदारत में हज़रत अमीर खुसरो की शायरी, आला हज़रत के इश्क़, रसूल के तराने और ख़ानकाहे आलिया मीनाईया के फैजान पर रोशनी डाली। ‘मेरा वकार मेरी आबरू जो बैठे हैं, मेरी तलाश मेरी जुस्तजू जो बैठे हैं, क्यों न खुसरो की तरह शेर पढ़ूं, रश्क करूं, मेरे निजाम मेरे रूबरू जो बैठे हैं।’ पढ़कर संचालक ने मुशायरे की शूरूआत की।

झारखण्ड के मशहूर शायर हबीबुल्ला फैज़ी ने पढ़ा कलाम

झारखण्ड के मशहूर शायर हबीबुल्ला फैज़ी ने पढ़ा-जुल्फ जब आपकी सरकार बिखर जाती है, तो चांद तारों पे कयामत सी गुज़र जाती है, जिसने देखा है मदीना वो यही कहता है, सब्ज गुम्बद पे नज़र जा के ठहर जाती है। इनके अलावा कलकत्ता के शायर दिलबर शाही, मोहम्मद अली फैज़ी, तनवीर जमाल उस्मानी, अम्बर मुशाहिदी, अहमदुल्फत्ताह, अख्तर काशिफ़, ज़ाकिर इस्माईली, आज़म मीनाई, शकील मीनाई आदि ने भी कलाम पेश किया।

इस मौके पर डॉ लायक अली, मौलाना वहीद गोंडवी, वली मोहम्मद, कारी निसार अहमद मीनाई, सैय्यद शहजाद, मौलाना मुजक्किर, कारी ज़ाकिर लखनवी, डॉ इक़बाल बलरामपुरी, रफ्फन मीनाई, एहसान मीनाई, रफीक आलम मीनाई, हाफिज सगीर मीनाई, इशरत अजीज, तबरेज आलम समेत हजारों अकीदतमंद मौजूद रहे।

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सम्पादक- ख़बर हिंदी
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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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