साइबर क्राइम-रिश्तेदार बताकर युवक के अकाउंट से उड़ा दिया पैंतीस हजार

A R Usmani
A R Usmani - सम्पादक- ख़बर हिंदी
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साइबर क्राइम ठगी के बाद भी मोबाइल है सक्रिय, फोन करने पर देता है गालियां, कार्रवाई को लेकर सुस्त है साइबर व सर्विलांस सेल |

गोण्डा। साइबर क्राइम की घटनाएं कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। पुलिस इस पर नकेल लगाने के लिए तमाम उपाय कर रही है और जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक भी कर रही है| लेकिन इसके बाद भी लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं।

ठगी के बाद भी मोबाइल है सक्रिय, फोन करने पर देता है गालियां, कार्रवाई को लेकर सुस्त है साइबर व सर्विलांस सेल

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ताजा मामला मनकापुर कोतवाली क्षेत्र के नयी बस्ती बैरीपुर रामनाथ का है। यहां के निवासी मुकेश कुमार पांडेय पुत्र देवनरायन पाण्डेय ने पुलिस अधीक्षक व कोतवाली मनकापुर में तहरीर दी है जिसमें कहा है

कैसे हुई साइबर क्राइम के ठगी का शिकार

कि 10 जनवरी को शाम करीब छह बजे उसके मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने रिश्तेदार बताया और बातें करने लगा। इसी दौरान उसने फोन पे व गूगल पे इस्तेमाल करने के बारे में पूछा और कहा कि अगर चलाते हो, तो मैं आपके अकाउंट में 35000 रूपये डाल दूं और आप मुझे ट्रांसफर कर दें। इसके बाद वह मुकेश के मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजता है जिसे खोलते ही उसके अकाउंट से 35000 रूपये कट जाता है। पीड़ित मुकेश पाण्डेय को जैसे पता चलता है कि उसके अकाउंट से रूपये निकल गये तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक जाती है।

पीड़ित ने साइबर क्राइम की इस घटना की सूचना तत्काल 1930 पर दर्ज कराई। इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक व कोतवाली मनकापुर में भी लिखित तहरीर दी। पीड़ित ने बताया कि जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था वह अभी भी सक्रिय है। फोन करने पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां देता है। मोबाइल चालू होने के बाद भी साइबर सेल व सर्विलांस सेल कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। ऐसे में इनकी कार्यशैली को लेकर पीड़ित में निराशा है

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सम्पादक- ख़बर हिंदी बचपन से ही पत्रकारिता का शौक था। मीडिया जैसे हथियार से समाज के दबे-कुचले, पिछड़े, शोषित, पीड़ित लोगों की मदद करने का जज्बा था जो अब भी बरकरार है। शुरूआत से ही सच लिखने का शौक़ था और जुनून भी। पीत पत्रकारिता करने वालों से घृणा है। नामचीन पत्रकारों के लेख मैं आज भी पढ़ता हूं। मकसद सिर्फ मिशन पत्रकारिता है। भारत के कई प्रिंट मीडिया संस्थानों में 25 वर्षों का योगदान रहा।
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