जोशीमठ को ध्वस्त करने का काम शुरू,
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से इंकार

Anjali Mishra
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हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड शहर शीमठ जो विकास से अब विनाश की समाधि लेने जा रहा है। बताते चले कि जोशीमठ में पिछले कई दिनों से वहां की जमीन धंसने लगी और घरों में दरारें आ गई। तपोवन बांध परियोजना द्वारा बनाया जा रहा सुरंग में विस्फोट करने के कारण ये हाल हुआ है।

इसके बाद जोशीमठ से मकानों में दरार पानी और जमीन धंसने की खबरें आने लगी है जिसको लेकर वह की प्रशासन ने जोशीमठ के पूरे इलाके को सिंकिंग जोन घोषित कर दिया है।
तमाम बुद्धजीवी और पर्यावरणविद इसका कारण सरकारों द्वारा चलाई जा रही विकास परियोजनाओं को दे रहे हैं। इसी को लेकर जोशीमठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश डिवाइस चंद्रचूर ने कहा कि हर मसले को सुप्रीम कोर्ट में लाना जरूरी नहीं है, और उन्होंने तत्काल फैसला देने से भी इंकार कर दिया है वही याचिका दायर कीअगली तारीख 16 जनवरी को सुनिश्चित किया गया है ।

क्यों सुर्ख़ियों में जोशीमठ?

आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में से एक जोशीमठ है जो हिमालय की गोद में बसा हुआ है जो अपने आप में तमाम प्राकृतिक सांस्कृतिक आध्यात्मिक धरोहरों को समेटे हुए हैं कहा जाता है कि शीत ऋतु में स्वयं बाबा बद्रीनाथ का वास होता है। चार मठों में से एक जोशीमठ आज विकास से विनाश का सजीव उदाहरण बन रहा है। कहा रहा है कि तमाम विकास परियोजनाएं जोशीमठ की त्रासदी का कारण बनी हुई है जिसके कारण जोशीमठ में जमीन धंसने मकानों में दरार का कारण है।

जोशीमठ में दरार का सच ?

उत्तराखंड का छोटा सा शहर जोशीमठ जहां एनटीपीसी द्वारा चलाई जा रही परियोजना तपोवन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट जिसके क्रियान्वयन के लिए 12 सौ मीटर सुरंग बनाई जा रही थीं, सुरंग बनाने के लिए टीपीएम टनल बोरिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा था जो बीच में ही फस गई जिसे निकालने के लिए सुरंग में एक ब्लास्ट करना पड़ा जिसके कारण जोशीमठ में बने मकानों के घरों में दरारें आने लगी। भारत सरकार और राज्य की सरकार की ओर से राहत बचाव का कार्य तेजी से चल रहा है। लेकिन अभी इस घटना की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं।

जोशीमठ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अटल

जोशीमठ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए पीसी नरसिम्हा की बेंच में चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हर मुद्दे की सुनवाई कोर्ट में जरूरी नहीं है. इसे फैसला करने के लिए सरकारें हैं । हम अभी इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। अगली तारीख 16 जनवरी को दी जाती है ।

अब आगे देखना होगा की सुप्रीम कोर्ट जोशीमठ के मामले पर क्या सुनवाई करता है। क्या जोशीमठ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दायर याचिका उनके पक्ष में आता है? क्या सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा? क्या सरकार इस पर कोई एक्शन लेगा या नहीं?

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संपादक- ख़बर हिंदी

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